Sunday, 15 June 2014

शिक्षिकाओं को मिलेगी मन माफिक तैनाती

भरना होगा पांच स्कूलों का विकल्प

परिषदीय स्कूलों की शिक्षिकाओं की सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें मनचाही तैनाती दी जाएगी। तैनाती ऐसे स्कूलों में दी जाएगी जहां से उन्हें आने-जाने में सहूलियत हो।

इसके लिए शिक्षिकाओं से सड़क के किनारे वाले स्कूलों का विकल्प लिया जाएगा। जल्द ही बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस बाबत निर्देश भेजने की तैयारी है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी महिलाओं को तैनाती देने से पहले उन्हें तीन से पांच स्कूलों का विकल्प मांगने के लिए खाली स्थानों वाले स्कूलों की सूची दी जाएगी।

महिलाएं इसके आधार पर अपना विकल्प देंगी। वे जो विकल्प देंगी उसके आधार पर ही उन्हें तैनाती दी जाएगी। 
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Saturday, 14 June 2014

विज्ञान, गणित अध्यापक के 29334 पदों पर होगी नियुक्ति, विशेष अपील खारिज


इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के पद दो माह के भीतर भरे जाने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध दाखिल विशेष अपील खारिज कर दी गई है। मामला विज्ञान और गणित के 29334 पदों पर नियुक्तियों का है। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने 29 मई 2014 को प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि इन पदों पर नियुक्तियां दो माह के भीतर कर ली जाएं। इस आदेश को आलोक कुमार दीक्षित ने विशेष अपील में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि एकल न्यायपीठ के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं दिख रहा इसलिए इसे खारिज कर दिया गया।
गणित और विज्ञान के 29334 पदों के लिए नियुक्ति का शासनादेश 11 जुलाई 2013 को जारी किया गया था। अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के 16 वें संशोधन को आधार बनाकर बेसिक शिक्षा प्रिरषद ने 29 अगस्त से 11 अक्तूबर 2013 के बीच इन पदों के लिए आवेदन मांगे। पूर्व में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पद प्रमोशन के आधार पर भरे जाते थे। प्राइमरी से प्रोन्नत शिक्षकों को उच्च प्राथमिक में जिम्मेदारी दी जाती थी लेकिन गणित, विज्ञान के लिए योग्य शिक्षक न मिलने की स्थिति में अलग से नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में नवंबर में हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। 29 मई को हाईकोर्ट ने फिर से आदेश जारी किया कि दो माह के भीतर इन पदों पर नियुक्तियां कर दी जाएं, साथ ही शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण करा दिया जाए। इसी आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि पूर्व आदेश प्रभावी रहेगा, नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जाएगी।

पहली टीईटी में पास को नौकरी नहीं, चौथे की तैयारी


इलाहाबाद। प्रदेश के सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2014 के आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी टीईटी 2014 के लिए प्रस्ताव तैयार करके शासन की तैयारी में जुटी हैं। इसे शीघ्र सरकार के पास भेज दिया जाएगा। परीक्षा नवंबर-दिसंबर में कराने की तैयारी है। सरकार एक ओर जहां चौथी बार टीईटी कराने की तैयारी में तो पहली बार 2011 में टीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों को ही नौकरी का इंतजार है। इसके बाद 2012 एवं 2013 में टीईटी पास करने वालों को नौकरी कब मिलेगी, इसको लेकर सरकार के पास जवाब नहीं है। तीन बार टीईटी पास किसी भी अभ्यर्थी को नौकरी नहीं मिल सकी है।
प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भर्ती के लिए 2010-11 में पहली बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराई गई थी। पहली बार टीईटी पास होने वाले अभ्यर्थियों को तीन साल बाद भी नौकरी नहीं मिल सकी है। 2011 में प्रदेश सरकार ने टीईटी पास अभ्यर्थियों के लिए 72825 पदों की घोषणा की थी। टीईटी 2011 के विवादों में होने के कारण ही सरकार एवं कोर्ट की ओर से बार-बार आदेशों केबाद भी शिक्षक भर्ती पूरी नहीं हो सकी है। इसके लिए सरकार को एनसीटीई से भी चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आग्रह करना पड़ा था।
प्रदेश शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप दो महीने के भीतर मई के अंतिम सप्ताह में भी भर्ती पूरी करनी थी। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश सरकार इन पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकी है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इस भर्ती को लेकर तैयारी की सूचना है। अब तो आलम यह है कि सरकार की ओर से इन पदों को चाहे जो तैयारी कर ली जाए, नए शैक्षिक सत्र में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को शिक्षक नहीं मिल सकेंगे। टीईटी पास अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर पहले 2011, 12 और 13 के सफल अभ्यर्थियों को नौकरी देने की मांग की है।

Friday, 13 June 2014

सहायक अध्यापक भर्ती निर्देश के खिलाफ अपील खारिज


जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सीनियर पदों की भर्ती प्रक्रिया दो माह में पूरी करने तथा नए सत्र में अध्यापकों की तैनाती करने के एकल न्यायपीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल विशेष अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल के आदेश पर यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है कि प्रश्नगत आदेश पर हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या की खण्डपीठ ने आलोक कुमार दीक्षित की विशेष अपील पर दिया है। एकल न्यायपीठ ने कहा था कि प्राइमरी शिक्षा मूल अधिकार में शामिल है। अध्यापकों के हजारों पद खाली हैं। यह राज्यहित में है कि शिक्षकों के खाली पद भरे जाएं।

प्रदेश में बढ़ गईं बीटीसी की 300 सीटें

प्रदेश में बीटीसी की 300 सीटें और बढ़ गई हैं। गुरुवार को राज्य स्तरीय समिति की बैठक में 133 निजी बीटीसी कॉलेजों की संबद्धता देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 60 कॉलेजों को संबद्धता प्रदान कर दी गई है। 

ये कॉलेज वर्तमान सत्र से ही बीटीसी के दाखिले ले सकेंगे। 36 कॉलेज ऐसे थे जिनके मानक पूरे नहीं थे। इसलिए इन्हें मान्यता नहीं दी गई। 

12 कॉलेजों को फिर से मानक पूरे करने के लिए समय दिया गया है। जबकि एक कॉलेज ऐसा था जिसके मानक पूरे न होने से उसकी मान्यता वापस ले ली गई।

Wednesday, 11 June 2014

पुराने विज्ञापन के आधार पर हो रही भर्ती


सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जून के अंत तक 72,825 शिक्षकों की भर्ती हो जाएगी लेकिन अभी भी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसका कारण पुराने विज्ञापन के आधार पर शिक्षकों की भर्ती होना है।

राजधानी में मंगलवार को लक्ष्मण मेला मैदान पर बड़ी संख्या में एकत्र बीएड 2012 के अभ्यर्थियों ने बैठक कर नियुक्ति की मांग को लेकर रणनीति बनाई।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य नरेंद्र यादव ने बताया कि इन लोगों ने वर्ष 2012 को प्राइमरी शिक्षकों के 72825 पदों के लिए आवेदन किया था।

मगर अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुपालन में सरकार द्वारा पुराने विज्ञापन से भर्ती प्रक्रिया होने जा रही है। जिससे इन स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में है।

केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर खुलेंगे मॉडल स्कूल


प्रदेश में केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर नए मॉडल स्कूल खोले जाएंगे। 148 मॉडल स्कूलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

45 स्कूलों के निर्माण के लिए जिला परियोजना कार्यालयों को प्रति विद्यालय 150.75 लाख रुपये राशि उपलब्ध करा दी गई है।

वर्ष 2013-14 के लिए 81 मॉडल स्कूलों की मंजूरी भारत सरकार से प्राप्त हो गई है। यह जानकारी प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री इकबाल महमूद ने दी।

इकबाल महमूद ने बताया कि प्रदेश के पिछड़े हुए विकास खंडों में केंद्रीय विद्यालयों के पैटर्न पर नवीन मॉडल स्कूलों की स्थापना के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र एवं राज्य का अंश क्रमश: 75:25 प्रतिशत है।

इन विद्यालयों में आवश्यक सामग्री, उपकरण तथा सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। विज्ञान, गणित तथा अंग्रेजी शिक्षण के अतिरिक्त कला, संगीत एवं सॉफ्ट-स्किल्स तथा व्यक्तित्व विकास पर बल दिया जाएगा।

कंप्यूटर ऐडेड शिक्षा भी दी जाएगी। मॉडल स्कूल योजना के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2010-11 में 148 मॉडल स्कूल स्वीकृत किए थे। इनके निर्माण कार्य के लिए शत-प्रतिशत राशि प्राप्त हो चुकी है।

Monday, 9 June 2014

शिक्षा विभाग के बाबूओं पर‌ गिरेगी गाज

मंत्रियों, अफसरों को ठिकाने लगाने के बाद अब प्रदेश सरकार की गाज शिक्षा विभाग के बाबूओं पर गिरने वाली है।

बताया जाता है कि शिक्षा विभाग में चल रहे बाबू राज को खत्म करने की तैयारी है। बाबू राज का आलम यह है कि वे अधिकारियों को काम नहीं करने देते हैं और जैसा चाहते हैं वैसा अपने हिसाब से कराते हैं।

प्रत्येक माह होने वाली समीक्षा बैठकों में शिक्षाधिकारी इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। इसलिए अब विभाग बाबुओं के कॉकस को तोड़ना चाहता है।

वह चाहता है कि सालों से एक ही स्थान पर जमे बाबुओं को दूसरे जिलों में भेजा जाए ताकि अधिकारी स्वतंत्र होकर काम कर सकें।

BTC काउंसलिंग का आज अंतिम मौका



निजी कॉलेजों में बीटीसी की रिक्त सीटों पर दाखिले के लिए काउंसलिंग का सोमवार को अंतिम मौका है। 

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इस संबंध में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) प्राचार्यों को इस संबंध में निर्देश भेज दिया है। 

उन्हें निर्देश दिया गया है कि काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भरी और रिक्त सीटो का ब्यौरा शाम तक निदेशालय को उपलब्ध करा दिया जाए। 

एससीईआरटी ने निजी कॉलेजों की रिक्त करीब 11,000 सीटों पर दाखिले से पहले 2 जून तक काउंसलिंग का मौका दिया था, लेकिन सीटों न भरने पर यह अवधि 9 जून तक बढ़ा दी गई।

42 जिलों में 141 गर्ल्स हॉस्टल बनेंगे


प्रदेश में स्कूली शिक्षा ग्रहण करने वाली गरीब छात्राओं को रहने और खाने की मुफ्त सुविधा मुहैया कराने के लिए हॉस्टल खोले जाएंगे।

पहले चरण में प्रदेश के 42 जिलों में 141 गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे। प्रत्येक हॉस्टल में 100 छात्राएं रह सकेंगी।

एक हॉस्टल पर 1.32 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनका निर्माण जल्द ही शुरू करा दिया जाएगा। इसमें अगले सत्र 2015-16 से दाखिला दिलाए जाने की योजना है।

केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत इंटर तक की शिक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना में 90 प्रतिशत राशि केंद्र देता है और राज्य सरकार को 10 फीसदी खर्च करना होता है

Thursday, 5 June 2014

हाईकोर्ट ने दिया आदेश

राज्य सरकार पहली बार जूनियर हाईस्कूलों में विज्ञान व गणित के शिक्षकों की सीधी भर्ती करना चाहती है। इन विषयों के 29,334 शिक्षकों की भर्ती होनी है।

बेसिक शिक्षा परिषद ने हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर जूनियर हाईस्कूलों में विज्ञान व गणित शिक्षकों की भर्ती के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजते हुए दिशा-निर्देश मांगा है।

हालांकि, सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार छह दिन के अवकाश पर हैं और वह अपना चार्ज विशेष सचिव को दे गए हैं। इसलिए उनके आने के बाद ही इस पर निर्णय होने की संभावना है।
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नए सत्र में नहीं मिलेंगी बदले कोर्स की किताबें

इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र में भी पुराने कोर्स की किताबें पढ़ाई जाएंगी। शासन के निर्देश पर 2013 में परिषदीय विद्यालयों की हिन्दी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, अंग्रेजी की पुस्तकों को अपग्रेड करने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाकर उनमें सुधार के लिए सुझाव मांगे गए थे। पाठ्यक्रम को अपग्रेड करने की जिम्मेदारी राज्य शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश को सौंपी गई थी। संस्थान के विशेषज्ञों की टीम ने कोर्स में बदलाव करके छोटे बच्चों को स्वास्थ्य शिक्षा से जोड़ने का सुझाव दिया था।
पाठ्यक्रम में बदलाव करने की सिफारिश राज्य शिक्षा संस्थान की ओर से तत्कालीन बेसिक शिक्षा सचिव सुनील कुमार को सौंप दी गई थी। उनके हटते ही पाठ्यक्रम में बदलाव की पहल ठंडे बस्ते में चली गई। राज्य शिक्षा संस्थान की ओर से तैयार नए पाठ्यक्रम में छात्रों को इस दौरान व्यवहारिक जानकारी से जोड़ने के साथ ही उन्हें विकास की जानकारी देने की सिफारिश की गई है। इस दौरान छात्रों को उनकी जिम्मेदारी से जोड़ने और कार्यस्थल पर शिक्षक के कर्तव्यों की जानकारी देने का सुझाव शामिल है। छात्रों को अपने यूनिफार्म की सफाई और दिन प्रतिदिन के ट्रैफिक नियमों की जानकारी देने के साथ साइकिल, बाइक, ट्रेन और हवाई जहाज के बारे में जानकारी देने का सुझाव दिया गया है। राज्य शिक्षा संस्थान भी इन दिनों में मुखिया विहीन चल रहा है। ऐसे में बदले कोर्स के अनुसार किताबें लागू करने की तैयारी पीछे चल रही है। बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर से सरकार की ओर से पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर पुस्तकें छापकर उन्हें आगामी शैक्षिक सत्र में पढ़ाने की तैयारी में है।

Wednesday, 30 April 2014

  1. विभाग का अभ्युदय तथा विकास 
    शिक्षा व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का प्रमुख साधन है। ‍शिक्षित व्यक्ति ही राष्ट्र की आर्थिक प्रगति को वास्तविक गति प्रदान कर सकते है। प्राचीन शिक्षा की पद्धति गुरूकुल प्रणाली में निहित थी। कालान्तर में मन्दिरों, मठों एवं मस्जिदों में शिक्षा का ‍विकास कार्यक्रम चलता रहा । भारत की आजादी के पूर्व ब्रिटिश शासकों ने सन 1858 में म्योर सेन्ट्रल कालेज, इलाहाबाद के अन्तर्गत शिक्षा की व्यवस्था प्रारम्भ की जिसमें प्राथमिक स्तर से विद्यालयों की शिक्षा का संचलान करने का अधिकार था।

    सेडलर कमीशन सन् 1917 के संस्तुतियों के आधार पर विश्विद्यालय शिक्षा को माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा से अलग किया गया। माध्यमिक तक की शिक्षा की व्यवस्था के लिए माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 प्रकाशित व प्रभावित किया । इसी तारतम्य में राजाज्ञा संख्या 214/2-2 दिनांक 31 मार्च 1923 द्वारा म्योर सेन्ट्रल कालेज, इलाहाबाद में विश्विद्यालय स्तर की शिक्षा को छोड़कर शेष की शिक्षा इससे अलग करके माध्यमिक स्तर की शिक्षा हेतु "डायरेक्टर उत्तर प्रदेश शासन" के शिक्षा विभाग के साथ अभि‍लिखित किया गया। अप्रैल 1939 में शिक्षा विभाग को सचिवालय से पृथक कर उसे उत्त्तर प्रदेश का एक अलग विभाग बनाया गया। राजाज्ञा संख्या 3436/15'263'46 दिनांक 26 जून 1947 द्वारा डायरेक्टर आफ पब्लिक इन्स्ट्रक्सन का नाम बदल कर "डायरेक्टर आफ एजूकेशन'' और बाद में शिक्षा निदेशक किया गया ।

    वर्ष 1972 तक उपर्युक्त व्यवस्था के अन्तर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर की शिक्षा निदेशक उत्तर प्रदेश के नियंत्रण, निदेशन एवं प्रशासन के अधीन थी। शिक्षा के बढ़ते कार्यों विद्यालयों एवं नये नये प्रयोगों के कुशल संचालन के कार्यक्रम को अधिक गतिशील एवं प्रभावी बनाने के उददेश्य से वर्ष 1972 में शिक्षा निदेशालय के विभाजन का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया जिसके अनुसार विभाजन करके शिक्षा का प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च् स्तर तथा प्रशिक्षण तीन खण्डों मे किया किया गया जिसके अलग-अलग निदेशक बनाये गये और पृथक बेसिक शिक्षा निदेशक बनाये गये। बेसिक शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं गतिशील बनाने के उद्देश्य से वर्ष 1985 मे पृथक बेसिक शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गयी। प्रशिक्षण एवं शोध कार्यक्रमों एवं उर्दू तथा प्राच्य भाषा को अधिक गतिशील व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अलग-अलग निदेशालय स्थापित किये गये।

    जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश देश का विशालतम प्रदेश है। शिक्षा जगत की व्यापक व्यवस्था के अनुरूप कार्य सम्पादन में सुविधा की दृष्टि से पूरे प्रदेश में प्रशासनिक कार्य सम्पादन के निर्मित 12 मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) के कर्यालय है जो समस्त प्रदेश का कार्य देखते है। जनपदीय स्तर पर प्राथमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था एवं नियंत्रण हेतु प्रदेश के जनपदों मे एक-एक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय स्थापित किये गये है। साथ ही विकास खण्ड स्तर पर सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की स्थापना की गई है जो विकास खण्ड स्तर पर शिक्षा का मार्ग दर्शन एवं मूल्यांकन सुनिश्चत करते हैं।

    जनगणना 2001 के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या 166197921 है जिसमें 87565369 पुरूष एवं 78632552 महिलायें हैं। कुल साक्षरता 56.3 प्रतिशत है जब कि पुरूषों एव महिलाओं की साक्षरता क्रमश: 68.8 एवं 42.2 प्रतिशत है जब कि भारत देश मे साक्षरता 64.80 प्रतिशत है जिसमें पुरूषों की साक्षरता 75.28 प्रतिशत तथा महिलाओं की साक्षरता 53.67 प्रतिशत है।

     
  2. खेलकूद एवं युवक कल्याण   
    छात्र - छात्राओं की ‍शिक्षा के साथ समुचित सामाजिकता एवं स्वस्थ्य नागरिकता का प्रशिक्षण  देना और उनके शरीर को हृष्ट - पृष्ट बनाना तथा उन्हें शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर स्वस्थ्य बनाये रखने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों को संचालित किया जाता है। इसके अन्तर्गत छात्र-छात्रा ख्लिड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए व्यायाम शिक्षक द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। विजेताओं को छात्रवृत्तियां देना राष्टीय शारीरिक दक्षता अभियान में विद्यालयों में पाठ्य सहगामी सांस्क़ृतिक कार्यक्रम, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों मे बालचर योजना का विस्तार, "अपना देश अपना प्रदेश जागो'' आदि योजनाएं सम्मिलित है। विद्यालयों में खेलकूद एवं अन्य शिक्षणेत्तर कार्यक्रम की प्रोन्नति हेतु विद्यालय क्रीडा संस्थान, फैजाबाद की स्थापना की गयी है।
     
  3. शैक्षिक शोध अध्यापक प्रशिक्षण 
    शैक्षिक समस्याओं का अध्ययन एवं अनुसंधान को विशिष्ट गति देने हेतु वर्ष 1981 में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण की स्थापना की गयी। इस प्रक्रिया में प्राथमिक एवं उच्च् प्राथमिक स्तर की संस्थाओं के अध्यापकों की सेवाकालीन शैक्षिक सुविधाओं को विस्त्तृत एवं व्यापक बनाना तथा वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समुन्नत कराना सम्मिलित है।
     
  4. मृत /अवकाश प्राप्त अध्यापकों की कल्याण योजना 
    1.मृत अवकाश प्राप्त एवं कार्यरत अध्यापकों के अध्ययनरत, विकलांग बच्चों के एक शैक्षिक सत्र के लिए निम्नांकित दर से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
    1.कक्षा 3 से 8 तकरू० 350.00 एक मुश्त
    2.कक्षा 9 से 10 तकरू० 800.00 तक मुश्त
    3.कक्षा 11 से 12 तकरू० 800.00 एक मुश्त
    4.स्नातक/स्नाकोत्तर/सी०टी०रू० 1000.00 एक मुश्त
     एल०टी०/ एम०बी०बी०एस०/टेक्निकल आदि 
                      
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    मृत अध्यापकों के आश्रितों जिनका कोई बालिक पुत्र रोजगार करने योग्य न हो तथा अवकाश प्राप्त अध्यापक जिनकी मासिक पेशन की धनराशि 500 रूपये से अधिक न हो को भरण पोषण हेतु 150 रूपये मासिक दर से कम-से-कम एक वर्ष तथा अधिक से अधिक 5 वर्ष तक दी जाती है।
    3.
    मृत अध्यापको  तथा ऐसे अवकाश प्राप्त अध्यापकों जिनकी वार्षिक आय मूल वेतन के अधार पर रूपये तीस हजार मात्र से अधिक न हो, की पुत्री जिनकी आयु 18 वर्ष से कम न हो की शादी हेतु 4000 या रू० 5000 तक एक मुश्त धनराशि स्वीकृत की जाती है।
    4.
    मृत अध्यापको की आश्रितों, अवकाश प्राप्त एवं कार्यरत अध्यापकों को जिसकी वार्षिक आय मूल वेतन के आधार पर 30,000 रूपया (रूपया तीस हजार मात्र) से अधिक न हो, स्वयं की अथवा उनके आश्रितों का चिकित्सा हेतु मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त अथवा अन्य डाक्टरों द्वारा दिये गये, प्रमाण पत्र पर जो मुख्य चिकित्साधकारी द्वारा प्रति हस्ताक्षरित हो, प्रमाण पत्र में अंकित बीमारी की गम्भीरता को देखते हुए रू० 750 से 5000 मात्र एक मुश्त धनराशि  स्वीक़ृत की जाती है।

    उक्त नियमों के अन्तर्गत प्राप्त आवेदन - पत्रों को आर्थिक्‍ सहायता स्वीकृत करने हेतु एतद् गठित समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाता है तथा समिति के अनुमोदनोपरान्त सहायता स्वीकृत की जाती है। अपूर्ण अथवा नियमान्तर्गत न प्राप्त होने वाले प्रार्थना - पत्र निरस्त कर दिये जाते है।
  5. स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान
    समाज के विकास में शिक्षा का एक महात्वपूर्ण स्थान है। इस बात को ध्यान मे रखते हुए अनुसूचित जातियों एव अनुसचित जन जातियों को विकास के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करने हेतु योजना मे विशेष प्रयास किया गया है। इनके लिए अनुसूचित जाति की घनी आबादी वाले क्षत्रो में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जा रहे है तथा उनके लिए प्रोत्साहन योजनायें चलायी जा रही है।
     
  6. अध्यापको को राज्य पुरस्कार वर्ष 1950 से भारत सरकार द्वारा अध्यापकों को ‍विशिष्ट सेवा हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने की योजना प्रारम्भ हुई। इस योजनान्तर्गत प्रतिवर्ष प्रदेश मे चुने हुए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्क़त एवं सम्मानित किया जाता है। वर्ष 1985 से प्रदेश स्तर पर ऐसे शिक्षकों का राज्य पुरस्‍कार प्रदान करना आरम्भ किया गया। इस योजना के अन्तर्गत चुने हुए अध्यापकों को 2000.00 रूपये नगद, एक ऊनी शाल, मेडल और प्रमाण पत्र दिया जाता है। इसके अतिरिक्त अध्यापकों को दो वर्ष की सेवा विस्तारण तथा एक अग्रिम वेतन वृद्धि दिये जाने का भी प्राविधान है।
    शासनादेश संख्या मा० 81/15-11-2004-1499(52) /2004 दिनांक 08 जुलाई 2004 द्वारा राज्य पुरस्कार प्राप्त अध्यापकों/अध्यापिकाओं को वर्तमान में दी जाने वाली धनराशि  रू० 2000/- (रू० दो हजार मात्र) की धनराशि को बढ़ाकर रू० 10000।- (दस हजार मात्र) किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई जो वित्तीय वर्ष 2004-05 से प्रभावी है।

    शासनादेश संख्या 886/15-11-2005-5(7)/2004 दिनांक 23.09.2005 द्वारा राष्ट्रीय/राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त अध्यापकों को राज्य परिवहन निगम की बसों मे प्रतिवर्ष् 1000 कि०मी० तक की निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की गई है।
    संदर्भशिक्षा की प्रगति
    प्राथमिक शिक्षा एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद 2006-2007  शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश इलाहाबाद।